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हाइकु


1

रिश्ते टूटते

घर बिखर जाता

बोला-बोली में। 

2

गाँव का घर

इसका न उसका

रिश्ता सबका।  

3

घर डरता

रिश्तों की जीभ लंबी

पड़ोसी-कान। 

4

लोग कमाते

सात पुश्तों का धन

रिश्ते किनारे। 

5

घड़ी सबकी

अलग ब्राण्ड वाली

वक्त भी वैसा!

6

बाजार जैसे 

रिश्तों में शर्तें लागू

रोज बदले।

7

शहरी रास्ते

पूछपरख गुम

मोल-भाव है। 

8

एकल घर

रिश्तों का सूनापन

क्लब आबाद। 

9

मन्नती धागे

घर बचाने बँधे

मौका-बेमौका। 

10

रिश्तों में एका

फले-फूले, महके

ताड़ अकेला। 

11

रिश्तों से घर

हवेली भूतहा है

कुत्ते भौंकते। 

12

रिश्तों की माला

घर-प्यार से गूँथे

रोज महके। 

13

तौल लीजिए 

रिश्तों का वजन भी

कर्ज़ माँग लें।।

14

घर जानता

सुख-दुख का आँसू

बाँट भी लेता। 

15

खुशी का पता

हवेली या कुटीर

पूछे डाकिया। 

16

खर्च होना है

जिंदगी भी पैसों सी

लोग कमा लें। 

…..

रमेश कुमार सोनी

‘अक्षरलीला’ 

रायपुर, छत्तीसगढ़