हाइकु बचपन के


1

समुद्र लीले

नन्हे घरौंदे डरे

माँ से लिपटे। 

2

पोता जो आया

बूढ़ा आँगन हँसा

मासूम बातें। 

3

बच्चों की भाषा

बर्तन भी खिलौना 

माता तू धन्य। 

4

खेल पुकारे

बेफ़िक्री के मैदान

किल्लोल मचा। 

5

क्रेयॉन रंग

कैनवास बच्चों का 

हँसी दीवार। 

6

झूला ना थका

बच्चे झुलाते हुए

माँ सा है मन। 

7

खट्टी इमली 

बचपन बुलाती

मासूम बातें। 

8

बच्चों के प्रश्न 

माता ही सुलझाती

विज्ञानी फेल। 

9

कच्ची अमिया

बच्चे बीनने दौड़े

आँधी के बाद।

10

चोंच में तृण

बड़ा सपना थामे

युवा पखेरु।

11

आज जो लड़े

कल साथ खेलते

बच्चों का खेल। 

12

बच्चों की भूख 

मनुहार थकता

माता ना थकी। 

13

बच्चों की ज़िद 

पिता पूरी करते

डाँट के बाद। 

14

भरा टिफ़िन 

माँ बिन कैसे खाता

स्कूल से लौटा। 

15

छुट्टियाँ ख़त्म

लौटा खिलौने वाला

घर अपने। 

16

नन्ही मुस्कान

गुल्लक सी खनके

छुट्टी में घर। 

…..

रमेश कुमार सोनी

रायपुर, छत्तीसगढ़



हाइकु


1

रिश्ते टूटते

घर बिखर जाता

बोला-बोली में। 

2

गाँव का घर

इसका न उसका

रिश्ता सबका।  

3

घर डरता

रिश्तों की जीभ लंबी

पड़ोसी-कान। 

4

लोग कमाते

सात पुश्तों का धन

रिश्ते किनारे। 

5

घड़ी सबकी

अलग ब्राण्ड वाली

वक्त भी वैसा!

6

बाजार जैसे 

रिश्तों में शर्तें लागू

रोज बदले।

7

शहरी रास्ते

पूछपरख गुम

मोल-भाव है। 

8

एकल घर

रिश्तों का सूनापन

क्लब आबाद। 

9

मन्नती धागे

घर बचाने बँधे

मौका-बेमौका। 

10

रिश्तों में एका

फले-फूले, महके

ताड़ अकेला। 

11

रिश्तों से घर

हवेली भूतहा है

कुत्ते भौंकते। 

12

रिश्तों की माला

घर-प्यार से गूँथे

रोज महके। 

13

तौल लीजिए 

रिश्तों का वजन भी

कर्ज़ माँग लें।।

14

घर जानता

सुख-दुख का आँसू

बाँट भी लेता। 

15

खुशी का पता

हवेली या कुटीर

पूछे डाकिया। 

16

खर्च होना है

जिंदगी भी पैसों सी

लोग कमा लें। 

…..

रमेश कुमार सोनी

‘अक्षरलीला’ 

रायपुर, छत्तीसगढ़